…तो ज़िंदा हो तुम

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा मूवी की फरहान अख्तर की प्यारी सी कविता:

तो ज़िंदा हो तुम

…तो ज़िंदा हो तुम

दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो,
तो ज़िंदा हो तुम
नज़र में ख्वाबों की बिजलियाँ लेके चल रहे हो,
तो ज़िंदा हो तुम

हवा के झोकों के जैसे आज़ाद रहना सीखो
तुम एक दरिया के जैसे लहरों में बहना सीखो
हर एक लम्हे से तुम मिलो खोले अपनी बाहें
हर एक पल एक नया समा देखे यह निगाहें

जो अपनी आँखों में हैरानियां लेके चल रहे हो,
तो ज़िंदा हो तुम
दिलों में तुम अपनी बेताबियाँ लेके चल रहे हो,
तो ज़िंदा हो तुम

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…तो ज़िंदा हो तुम

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