ऋषि कपूर के सर्वश्रेष्ठ अनमोल विचार/डायलॉग

ऋषि कपूर के हिंदी कोट्स

ऋषि कपूर के सर्वश्रेष्ठ डायलॉग

ऋषि कपूर के फेमस डायलॉग

हर इश्क़ का वक्त होता हैं, वो हमारा वक्त नही था, पर इसका मतलब यह नही की वो इश्क नही था।

हम सैकड़ो जनम लेते हैं, कभी पति-पत्नी बनकर, कभी प्रेमी बनकर, तो कभी अनजाने बनकर….लेकिन मिलते जरूर हैं आखिर में… नही मिलेंगे तो कहानी खत्म कैसे होगी…इसे प्यार कहते हैं।

शराब पीने दे मस्जिद में बैठकर ग़ालिब…या फिर वो जगह बात दो जहा खुद नही है।

फ़ना

अपना घर आबाद करना हैं तो वही रहना चाहिए, किसी के शहर चले जाने से, शहर तो आबाद हो जाएगा लेकिन अपना घर वीरान हो जाएगा।

सनम रे

हम आज जो फैसला करते हैं, वही हमारे कल का फैसला करेगा।

फ़ना

कभी-कभी बरसों साथ रहने के बाद भी कोई रिश्ता नहीं बनता है कोई पहचान नहीं बनती और कभी-कभी उपासना ऐसा लगता है जैसे कि बरसों से जानते हो।

दामिनी

एक दिन गालियों का शोर, तालियों की गूंज में छुप जाएगा।

पटियाला हाउस

सभी इंसान एक जैसे ही तो होते हैं, वही दो हाथ दो पांव, आंखे, कान, चेहरा… सबके एक जैसे ही तो होते हैं। फिर क्यो कोई एक, सिर्फ एक ऐसा होता हैं जो इतना प्यार लगने लगता हैं…के उसके लिए जान भी देनी पड़े… तो हंसते हंसते दी जा सकती हैं।

प्रेम रोग

मोहबत रीति रिवाज नही मानती हैं, और न ही वो लफ़्ज़ों की मोहताज हैं।

दीवाना

जब दो इंसान एक दूसरे की रूह को छू ले, तो उसे प्यार कहते हैं।

सनम रे

जी करता हैं, तुम्हारी हर ख्वाहिश, हर इच्छा को अपना मक़सद बना लू।

दामिनी

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