स्वामी विवेकानंद जी के जीवन के कुछ प्रेरक प्रसंग Prerak Prasang Of Swami Vivekananda

विवेकानंद एक ऐसे व्यक्तित्व है जो देश के हर युवा के लिये आदर्श है। उनकी कही एक भी बात पर यदि कोई अमल कर ले तो सफल हो जाये। आइये आज स्वामी विवेकानंदजी के जीवन के प्रेरक प्रसंग के बारे में जानते है।

स्वामी विवेकानंद अनमोल विचार

1) स्वामी विवेकानंद के प्रेरक प्रसंग १

एक बार स्वामी विवेकानंद हिमालय की यात्रा पर थे तभी उन्होंने वहा एक वृद्ध आदमी को देखा जो बिना कोई आशा लिये अपने पैरो की तरफ देख रहा था और आगे जाने वाले रास्ते की तरफ देख रहा था।

तभी उस इंसान ने स्वामीजी से कहा, “हे महोदय, इस दुरी को कैसे पार किया जाये, अब मै और नही चल सकता, मेरी छाती में दर्द हो रहा है।” स्वामीजी शांति से उस इंसान की बातो को सुन रहे थे और उसका कहना पूरा होने के बाद उन्होंने जवाब दिया कि,

“नीचे अपने पैरो की तरफ देखो। तुम्हारे पैरो के नीचे जो रास्ता है,यह वो वह रास्ता है जिसे तुमने पार कर लिया है और यह वही रास्ता था जो पहले तुमने अपने पैरो के आगे देखा था, अब आगे आने वाला रास्ता भी जल्द ही तुम्हारे पैरो के नीचे होंगा।” स्वामीजी के इन शब्दों ने उस वृद्ध इंसान को अपने लक्ष्य को पूरा करने में काफी सहायता की।

2) स्वामी विवेकानंद के प्रेरक प्रसंग २

एक बार स्वामी विवेकानंद किसी देश में भ्रमण कर रहे थे। अचानक, एक जगह से गुजरते हुए उन्होंने देखा पुल पर खड़े कुछ युवाओं को नदी में तैर रहे अंडे के छिलकों पर बन्दूक से निशाना लगाते देखा। किसी भी युवक का एक भी निशाना सही नहीं लग रहा था।

तब उन्होंने ने एक युवक से बन्दूक ली और खुद निशाना लगाने लगे। उन्होंने अंडे पर पहला निशाना लगाया और वो बिलकुल सही लगा, फिर एक के बाद एक उन्होंने कुल 10 निशाने लगाए। और सभी बिलकुल सटीक लगे, ये देख युवक दंग रह गए और उन्होंने पुछा – स्वामी जी, भला आप ये कैसे कर लेते हैं? आपके सारे निशाने बिलकुल सटीक कैसे लग गये?

स्वामी विवेकनन्द जी बोले असंभव कुछ भी नहीं है, तुम जो भी कर रहे हो अपना पूरा दिमाग उस समय उसी एक काम में लगाओ। अगर तुम किसी चीज पर निशाना लगा रहे हो तो तम्हारा पूरा ध्यान सिर्फ अपने निशाने के लक्ष्य पर होना चाहिए। तब तुम अपने लक्ष्य से कभी चूकोगे नहीं।

यदि तुम अपना पाठ पढ़ रहे हो तो सिर्फ पाठ के बारे में सोचो। मेरे देश में बच्चो को यही पढाया जाता है।

स्वामी विवेकानंद अनमोल विचार
स्वामी विवेकानंद अनमोल विचार

3) स्वामी विवेकानंद के प्रेरक प्रसंग ३

एक बार स्वामी विवेकानंद ट्रेन में यात्रा कर रहे थे। उन्होंने अपने हांथो में राजा द्वारा उपहार में दी गयी घडी पहनी थी।
वही उनके पास में कुछ लडकिया भी बैठी थी जो स्वामी विवेकानंद की वेशभूषा का मजाक उड़ा रही थी। तभी उन्होंने स्वामीजी का ठगने की ठानी।

उन्होंने स्वामीजी को उनकी घडी उन्हें देने को कहा और यदि उन्होंने नहीं दी तो वे सुरक्षाकर्मी से कहेंगे की स्वामीजी उनके साथ शारीरिक शोषण कर रहे थे। ऐसा कहते हुए उन्होंने स्वामीजी को धमकाया।

तभी स्वामीजी ने बहरा होने का नाटक किया और लडकियों से वे जो कुछ भी चाहती है उसे लिखकर देने को कहा। लडकियों ने वो जो कुछ भी चाहती है वो लिखा और स्वामीजी को दे दिया।

तभी स्वामीजी बोले,

“सुरक्षाकर्मी को बुलाइये, मुझे शिकायत करनी है।”
इस तरह विवेकानंद हमेशा सतर्क और चालाक रहते थे।

SWAMI VIVEKANAND JI SUVICHAR IN HINDI

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