हिंदी दिवस पर महापुरुषों के विचार

हिंदी दिवस पर अनमोल विचार व वचन

हिंदी दिवस पर महापुरुषों के अनमोल विचार

भाषा की समृद्धि स्वतंत्रता का बीज है।

लोकमान्य तिलक

हिंदी को देश में परस्पर संपर्क भाषा बनाने का कोई विकल्प नहीं, अंग्रेजी कभी जनभाषा नहीं बन सकती।

मोरारजी भाई देसाई

राष्ट्रभाषा के बिना एक राष्ट्र गूँगा है।

महात्मा गाँधी

हिन्दी संस्कृत की सभी बेटियों में सबसे अच्छी और शिरोमणि है।

ग्रियर्सन

सम्पूर्ण भारत के परस्पर व्यवहार के लिए ऐसी भाषा की आवश्यकता है जिसे जनता का बड़ा भाग पहले से ही जानता समझता है।

महात्मा गाँधी

मातृभाषा हिन्दी पर महापुरुषों के सुविचार

निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।

भारतेंदु हरिश्चंद्र

भाषा के उत्थान में एक भाषा का होना आवश्यक है। इसलिए हिन्दी सबकी साझा भाषा है।

पं. कृ. रंगनाथ पिल्लयार

मैं मानती हूँ कि हिन्दी के प्रचार से राष्ट्र की एकता जितनी बढ़ सकती है वैसी बहुत कम चीजों से बढ़ सकेगी।

लीलावती मुंशी

हिन्दी उर्दू के नाम को हटाइये, एक भाषा बनाइए। सबको इसके लिए तैयार कीजिए।

देवी प्रसाद गुप्त

राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है।

अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

हिंदी दिवस कोट्स

राष्ट्रभाषा हिन्दी का किसी भी क्षेत्रीय भाषा से कोई संघर्ष नहीं है।

अनंत गोपाल शेवड़े

दक्षिण की हिन्दी विरोधी नीति असल में दक्षिण की नहीं, बल्कि कुछ अंग्रेजी भक्तों की नीति है।

के.सी. सारंगमठ

हिन्दी ही भारत की राष्ट्रभाषा हो सकती है।

वी. कृष्णस्वामी अय्यर

राष्ट्र की एकता की कड़ी हिन्दी ही जोड़ सकती है।

बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’

दिल की कोई भाषा नहीं है, दिल दिल से बातचीत करता है।

महात्मा गाँधी

मातृभाषा हिन्दी पर महापुरुषों के विचार

संस्कृत माँ, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है।

डॉ. फादर कामिल बुल्के

राज व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की शीघ्र उन्नति के लिए आवश्यक है।

महात्मा गाँधी

किसी विदेशी भाषा का किसी स्वतंत्र राष्ट्र के राजकाज और शिक्षा की भाषा होना सांस्कृतिक गुलामी है।

वाल्टर चेनिंग

यदि आपको स्वदेशाभिमान सीखना है तो मछली से सीखें जो स्वदेश (पानी) के लिए तड़प तड़प कर जान दे देती है।

सुभाषचंद्र बोस

हिन्दी अपने देश और भाषा की प्रभावशाली विरासत है

माखनलाल चतुर्वेदी

सरलता, बोधगम्यता और शैली की दृष्टि से दुनिया की भाषाओं में हिन्दी महानतम स्थान रखती है।

अमरनाथ झा

किसी भाषा की उन्नति का पता करना हो तो उसमें प्रकाशित हुई पुस्तकों की संख्या तथा उनके विषय के महत्व से जाना जा सकता है।

गंगाप्रसाद अग्निहोत्री

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