सम्राट अशोक के 8 अनमोल विचार

सम्राट अशोक के प्रसिद्द कथन

कोई भी समाज समृद्ध नहीं हो सकता, अगर इसका लक्ष्य केवल चीज़ो को आसान बनाना हैं। इसके बजाय लोगों को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखना चाहिए।
No society can prosper if it aims at making things easier-instead it should aim at making people stronger.

Ashoka-The Great

किसी को केवल अपने धर्म का सम्मान करके दूसरे धर्मों की निंदा नहीं करना चाहिए।
One should not honor only one’s own religion and condemn other religions.

Ashoka-The Great

सबसे महान जीत प्यार की है, यह हमेशा के लिए दिलो को जीतता है।
The most noble victory is that of love, it wins the hearts forever.

Ashoka-The Great

पिता, माता और बड़ो का सम्मान किया जाना चाहिए और सजीवों के प्रति दया भाव रखना चाहिए।और यह सत्य सभी को जानना चाहिए।
Father and mother should be respected and so should elders, kindness to living beings should be made strong and the truth should be spoken.

Ashoka-The Great

Ashoka The Great Quotes in Hindi

वह जो केवल अपने संप्रदाय का सम्मान करता हैं और अपने संप्रदाय का मान बढ़ने के लिए दूसरे संप्रदाय का अपमान करता हैं। इस तरह के आचरण से वो खुद के संप्रदाय को गंभीर क्षति पहुंचाता हैं।
He who does reverence to his own sect, while disparaging the sects of others with intent to enhance the glory of his own sect, by such conduct inflicts the severest injury on his own sect.

Ashoka-The Great

सभी को सुनिए, और दूसरों द्वारा दावा किए गए सिद्धांतों को सुनने के लिए तैयार रहना चाहिए।
Let all listen, and be willing to listen to the doctrines professed by others.

Ashoka-The Great

दूसरे धर्मो की निंदा करने की मनाही हैं। सच्चा आस्तिक वो ही हैं जो दूसरे धर्मो में जो कुछ भी सम्मान के योग्य हैं, उन्हें सम्मान देता हैं।
It is forbidden to decry other sects; the true believer gives honour to whatever in them is worthy of honour.

Ashoka-The Great

सभी देशों में सभी सिद्धांतोंवादियों को एकजुट होकर एक आम फैलोशिप में रहना चाहिए। सभी सिद्धान्तवादियो को उस एक(परमपिता, अल्लाह आदि) को पाने के लिए और हृदय की शुद्धता प्राप्त करने के लिए एकजुट होना चाहिए।

May the partisans of all doctrines in all countries unite and live in a common fellowship. For all alike profess mastery to be attained over oneself and purity of the heart.

Ashoka-The Great

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