गुलजार साहब की मशहूर शायरी, Quotes, Status, Poetry & Thoughts

गुलज़ार एक अहसास

गुलज़ार साहब के लिखें हुए दिल को छू जाने वाले गाने, नज़्में, शायरिया, ग़ज़लें, रोमांटिक कोट्स आज भी हर किसी के होठों पर हमेशा रहते हैं, वही गुलज़ार साहब आज भी अपने शब्दों के जादू से सब के दिलो पर राज कर रहे हैं। आज हम आपके लिए लाये हैं उन्ही के लिखें कुछ कोट्स, शायरी, ग़ज़लें और भी बहुत कुछ।

गुलज़ार साहब के कुछ कोट्स और शायरी

कुछ अलग करना हो तो
भीड़ से हट के चलिए,
भीड़ साहस तो देती हैं
मगर पहचान छिन लेती हैं

Gulzar Sahab

अच्छी किताबें और अच्छे लोग
तुरंत समझ में नहीं आते हैं,
उन्हें पढना पड़ता हैं

Gulzar Sahab

सुनो…
जब कभी देख लुं तुमको
तो मुझे महसूस होता है कि
दुनिया खूबसूरत है

Gulzar Sahab

मैं दिया हूँ
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं

Gulzar Sahab

गुलजार की दो लाइन शायरी

बहुत अंदर तक जला देती हैं,
वो शिकायते जो बया नहीं होती

Gulzar Sahab

एक सपने के टूटकर चकनाचूर हो जाने के बाद
दूसरा सपना देखने के हौसले का नाम जिंदगी हैं

Gulzar Sahab

तकलीफ़ ख़ुद की कम हो गयी,
जब अपनों से उम्मीद कम हो गईं

Gulzar Sahab

घर में अपनों से उतना ही रूठो
कि आपकी बात और दूसरों की इज्जत,
दोनों बरक़रार रह सके

Gulzar Sahab

कौन कहता हैं कि हम झूठ नहीं बोलते
एक बार खैरियत तो पूछ के देखियें

Gulzar Sahab

कुछ बातें तब तक समझ में नहीं आती
जब तक ख़ुद पर ना गुजरे

Gulzar Sahab

शायर बनना बहुत आसान हैं
बस एक अधूरी मोहब्बत की मुकम्मल डिग्री चाहिए

Gulzar Sahab

गुलजार दोस्ती and Love शायरी

वो चीज़ जिसे दिल कहते हैं,
हम भूल गए हैं रख के कहीं

Gulzar Sahab

तेरे जाने से तो कुछ बदला नहीं,
रात भी आयी और चाँद भी था, मगर नींद नहीं

Gulzar Sahab

कभी तो चौक के देखे वो हमारी तरफ़,
किसी की आँखों में हमको भी वो इंतजार दिखे

Gulzar Sahab

कैसे करें हम ख़ुद को
तेरे प्यार के काबिल,
जब हम बदलते हैं,
तो तुम शर्ते बदल देते हो

Gulzar Sahab

किसी पर मर जाने से होती हैं मोहब्बत,
इश्क जिंदा लोगों के बस का नहीं

Gulzar Sahab

तन्हाई की दीवारों पर
घुटन का पर्दा झूल रहा हैं,
बेबसी की छत के नीचे,
कोई किसी को भूल रहा हैं

Gulzar Sahab

शोर की तो उम्र होती हैं
ख़ामोशी तो सदाबहार होती हैं

Gulzar Sahab

वक्त रहता नहीं कही भी टिक कर,
आदत इसकी भी इंसान जैसी हैं

Gulzar Sahab

हाथ छुटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते,
वक्त की शाख से लम्हें नहीं तोडा करते

Gulzar Sahab

दिल अगर हैं तो दर्द भी होंगा,
इसका शायद कोई हल नहीं हैं

Gulzar Sahab

गुलज़ार शायरी इन हिंदी

एक बार तो यूँ होगा, थोड़ा सा सुकून होगा
ना दिल में कसक होगी, ना सर में जूनून होगा

Gulzar Sahab

लकीरें हैं तो रहने दो
किसी ने रूठ कर गुस्से में शायद खींच दी थी
उन्ही को अब बनाओ पाला, और आओ कबड्डी खेलते हैं

Gulzar Sahab

छोटा सा साया था, आँखों में आया था
हमने दो बूंदों से मन भर लिया

Gulzar Sahab

सामने आया मेरे, देखा भी, बात भी की
मुस्कुराए भी किसी पहचान की खातिर
कल का अखबार था, बस देख लिया, रख भी दिया

Gulzar Sahab

बेहिसाब हसरते ना पालिये
जो मिला हैं उसे सम्भालिये

Gulzar Sahab

गुलजार हिंदी कविता

आदमी बुलबुला है पानी का
और पानी की बहती सतह पर टूटता भी है, डूबता भी है,
फिर उभरता है, फिर से बहता है,
न समंदर निगला सका इसको, न तवारीख़ तोड़ पाई है,
वक्त की मौज पर सदा बहता आदमी बुलबुला है पानी का।

Gulzar Sahab

बीच आसमाँ में था
बात करते- करते ही
चांद इस तरह बुझा
जैसे फूंक से दिया
देखो तुम….
इतनी लम्बी सांस मत लिया करो

Gulzar Sahab

सूरज झांक के देख रहा था खिड़की से
एक किरण झुमके पर आकर बैठी थी,
और रुख़सार को चूमने वाली थी कि
तुम मुंह मोड़कर चल दीं और बेचारी किरण
फ़र्श पर गिरके चूर हुईं
थोड़ी देर, ज़रा सा और वहीं रूकतीं तो

Gulzar Sahab

आओ तुमको उठा लूँ कंधों पर
तुम उचकाकर शरीर होठों से चूम लेना
चूम लेना ये चाँद का माथा
आज की रात देखा ना तुमने
कैसे झुक-झुक के कोहनियों के बल
चाँद इतना करीब आया है

Gulzar Sahab

Gulzar Quotes on Friendship

ज्यादा कुछ नहीं बदलता उम्र के साथ
बस बचपन की जिद्द समझौतों में बदल जाती हैं

Gulzar Sahab

बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला
जब से डिग्रियां समझ में आयी पांव जलने लगे हैं

Gulzar Sahab

कुछ जख्मो की उम्र नहीं होती हैं
ताउम्र साथ चलते हैं, जिस्मो के ख़ाक होने तक

Gulzar Sahab

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज ये किस बात पे रोना आया

Gulzar Sahab

कभी जिंदगी एक पल में गुजर जाती हैं
और कभी जिंदगी का एक पल नहीं गुजरता

Gulzar Sahab

Gulzar Quotes, Shayari on Love in Hindi

समेट लो इन नाजुक पलो को
ना जाने ये लम्हे हो ना हो
हो भी ये लम्हे क्या मालूम शामिल
उन पलो में हम हो ना हो

Gulzar Sahab

उसने कागज की कई कश्तिया पानी उतारी और
ये कह के बहा दी कि समन्दर में मिलेंगे

Gulzar Sahab

जिंदगी के ऊपर ग़ुलज़ार शायरी

टूट जाना चाहता हूँ, बिखर जाना चाहता हूँ
में फिर से निखार जाना चाहता हूँ
मानता हूँ मुश्किल हैं…
लेकिन में गुलज़ार होना चाहता हूँ

Gulzar Sahab

बिगड़ैल हैं ये यादे
देर रात को टहलने निकलती हैं

Gulzar Sahab

सुना हैं काफी पढ़ लिख गए हो तुम
कभी वो भी पढ़ो जो हम कह नहीं पाते हैं

Gulzar Sahab

मैं दिया हूँ
मेरी दुश्मनी तो सिर्फ अँधेरे से हैं
हवा तो बेवजह ही मेरे खिलाफ हैं

Gulzar Sahab

मैंने मौत को देखा तो नहीं
पर शायद वो बहुत खूबसूरत होगी
कमबख्त जो भी उससे मिलता हैं
जीना ही छोड़ देता हैं

Gulzar Sahab

उन्हें ये जिद थी कि हम बुलाये
हमें ये उम्मीद थी कि वो पुकारे
हैं नाम होंठो पे अब भी लेकिन
आवाज में पड़ गयी दरारे

Gulzar Sahab

गुलज़ार दिल से कोट्स

आदतन तुम ने कर दिए वादे
आदतन हम ने ऐतबार किया
तेरी राहो में बारहा रुक कर
हम ने अपना ही इंतज़ार किया
अब ना मांगेंगे जिंदगी या रब
ये गुनाह हम ने एक बार किया

Gulzar Sahab

पलक से पानी गिरा है,
तो उसको गिरने दो
कोई पुरानी तमन्ना,
पिंघल रही होगी

Gulzar Sahab

बहुत मुश्किल से करता हूँ,
तेरी यादों का कारोबार,
मुनाफा कम है,
पर गुज़ारा हो ही जाता है

Gulzar Sahab

कोई पुछ रहा हैं मुझसे मेरी जिंदगी की कीमत
मुझे याद आ रहा है तेरा हल्के से मुस्कुराना

Gulzar Sahab

ऐ हवा उनको कर दे खबर मेरी मौत की… और कहना कि
कफ़न की ख्वाहिश में मेरी लाश
उनके आँचल का इंतज़ार करती है

Gulzar Sahab

बहुत अंदर तक जला देती है,
वो शिकायतें जो बयाँ नही होती

Gulzar Sahab

मैंने दबी आवाज़ में पूछा – “मुहब्बत करने लगी हो?”
नज़रें झुका कर वो बोली – “बहुत

Gulzar Sahab

Gulzar Sahab Best Poetry

तेरी यादों के जो आखिरी थे निशान,
दिल तड़पता रहा, हम मिटाते रहे…
ख़त लिखे थे जो तुमने कभी प्यार में,
उसको पढते रहे और जलाते रहे

Gulzar Sahab

कहू क्या वो बड़ी मासूमियत से पूछ बैठे है ,
क्या सचमुच दिल के मारों को बड़ी तकलीफ़ होती है
तुम्हारा क्या तुम्हें तो राहे दे देते हैं काँटे भी ,
मगर हम खांकसारों को बड़ी तकलीफ़ होती है

Gulzar Sahab

गुलज़ार लाइफ कोट्स हिंदी

देखो, आहिस्ता चलो, और भी आहिस्ता ज़रा
देखना, सोच-सँभल कर ज़रा पाँव रखना,
ज़ोर से बज न उठे पैरों की आवाज़ कहीं.
काँच के ख़्वाब हैं बिखरे हुए तन्हाई में,
ख़्वाब टूटे न कोई, जाग न जाये देखो,
जाग जायेगा कोई ख़्वाब तो मर जाएगा

Gulzar Sahab

शब्द नए चुनकर कविता हर बार लिखू
उन दो आँखों में अपना सारा प्यार लिखू
वो में विरह की वेदना लिखू या मिलन की झंकार लिखू
कैसे इन चंद लफ्जो में दोस्तों अपना सारा प्यार लिखू

Gulzar Sahab

ना दूर रहने से रिश्ते टूट जाते हैं
ना पास रहने से जुड़ जाते हैं
यह तो एहसास के पक्के धागे हैं
जो याद करने से और मजबूत हो जाते हैं

Gulzar Sahab

एक सो सोलह चाँद की रातें
एक तुम्हारे कंधे का तिल
गीली मेहँदी की खुश्बू
झूठ मूठ के वादे
सब याद करादो, सब भिजवा दो
मेरा वो सामान लौटा दो

Gulzar Sahab

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इस प्यारी सी खूबसूरती के लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया, गुलज़ार साहब…

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2 comments

  1. बहुत खुब. मज़ा आ गया . गुलज़ार साहब के शब्दों को आपने पंख डे डाला. Thanks

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